वैष्णव तीर्थ

वृन्दावन

यमुना के किनारे बसा वह वन, जहाँ भागवत पुराण की बाल लीलाएँ घटीं
📍 मथुरा ज़िला, उत्तर प्रदेश
स्थान
मथुरा ज़िला, उत्तर प्रदेश
नदी
यमुना
मुख्य देवता
श्री कृष्ण
📖 भागवत पुराण — दशम स्कंध (कृष्ण बाल लीला)

भागवत पुराण के दशम स्कंध में बताया गया है कि कृष्ण का बचपन वृन्दावन में बीता। यहाँ यशोदा माँ और नंदबाबा के घर वे पले-बढ़े। गाय चराते हुए वे अपने साथियों — गोप-बालकों — के साथ यमुना के किनारे और वन की पगडंडियों पर घूमते थे।

भागवत पुराण के अनुसार एक बार कृष्ण ने माखन चुराकर गोपियों के घर तक पहुँचा दिया। यशोदा माँ ने उन्हें पकड़ा और ऊखल से बाँधने की कोशिश की — पर हर बार रस्सी दो अंगुल छोटी रह जाती थी। यह प्रसंग भागवत पुराण में दामोदर-लीला के नाम से आता है।

दशम स्कंध में वर्णित है कि वृन्दावन के पास यमुना में एक बड़ा सर्प रहता था — कालिया। कृष्ण ने यमुना में कूदकर कालिया के फन पर नृत्य किया और उसे नदी छोड़कर जाने को कहा। यमुना का जल फिर निर्मल हो गया।

भागवत पुराण में गोवर्धन प्रसंग भी वृन्दावन से जुड़ा है। भारी वर्षा में कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठाकर गाँव वालों को आश्रय दिया। यह स्थान आज भी वृन्दावन से लगभग बाईस किलोमीटर दूर है। सरल आस्था के कहानियाँ खंड में कृष्ण बाल लीलाओं के कुछ प्रसंग उपलब्ध हैं।

भागवत पुराण के दशम स्कंध में वृन्दावन को कृष्ण की बाल लीलाओं की भूमि के रूप में वर्णित किया गया है।

वृन्दावन परंपरागत रूप से वैष्णव तीर्थों में एक महत्वपूर्ण स्थान माना जाता रहा है। यमुना के किनारे बसे इस वन-क्षेत्र का उल्लेख भागवत पुराण में बार-बार आता है। भक्त यहाँ यमुना की परिक्रमा करते आए हैं और प्रातःकाल नदी तट पर दीपदान की परंपरा रही है।

वृन्दावन और मथुरा एक-दूसरे से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर हैं। दोनों नगरों की यात्रा परंपरा में एक साथ होती आई है। यमुना की इस परिक्रमा को 'ब्रज परिक्रमा' के रूप में जाना जाता है।

मुख्य नदी
यमुना
पौराणिक उल्लेख
भागवत पुराण, दशम स्कंध
प्रमुख लीलाएँ
माखन-चोरी, कालिया मर्दन, गोवर्धन धारण
पास के स्थान
मथुरा लगभग 10 किमी, गोवर्धन लगभग 22 किमी
✈️
हवाई मार्ग
दिल्ली का इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लगभग 150 किलोमीटर दूर है। आगरा हवाई अड्डा लगभग 75 किलोमीटर पर पड़ता है।
🚂
रेल मार्ग
मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन वृन्दावन से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। वहाँ से बस और टैक्सी नियमित चलती हैं।
🚗
सड़क मार्ग
राष्ट्रीय राजमार्ग 44 (दिल्ली-आगरा) से मथुरा होते हुए वृन्दावन पहुँचा जाता है। दिल्ली से लगभग 150 किलोमीटर।
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विशेष
मथुरा और वृन्दावन एक-दूसरे से सटे हुए नगर हैं। दोनों की यात्रा एक साथ सुविधाजनक रहती है।