देवी भागवत पुराण और स्थानीय माहात्म्य परंपरा में त्रिकूट पर्वत का उल्लेख देवी के स्थान के रूप में मिलता है। परंपरा में देवी यहाँ तीन रूपों — महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती — में मानी जाती रही हैं।
मुख्य गुफा प्राकृतिक है। इसके भीतर तीन पिंडी रूप में देवी का स्वरूप माना जाता रहा है। पुरानी परंपरा के अनुसार यह तीनों पिंडी देवी के तीन रूपों का प्रतीक मानी जाती हैं।
सात सौ वर्षों से अधिक समय से यहाँ निरंतर तीर्थयात्रा की परंपरा रही है। यह उत्तर भारत के प्रमुख देवी तीर्थों में से एक माना जाता रहा है।
देवी भागवत पुराण में त्रिकूट पर्वत को देवी के स्थान के रूप में वर्णित किया गया है।
वैष्णो देवी तीर्थ अपनी विशेष भौगोलिक स्थिति के लिए जाना जाता है। यह जम्मू क्षेत्र के त्रिकूट पर्वत की प्राकृतिक गुफा में स्थित है। यहाँ पहुँचने के लिए कटरा से लगभग तेरह किलोमीटर का पैदल मार्ग है।
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा तीर्थ का प्रबंधन होता है। मार्ग के बीच में कई विश्राम स्थल हैं। पहाड़ों के बीच का यह यात्रा-मार्ग अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है।
- तीर्थ वर्ष भर खुला रहता है और भक्त यहाँ हर मौसम में आते आए हैं।
- परंपरा में भक्त कटरा से पैदल यात्रा करके गुफा तक पहुँचते आए हैं।
- मार्ग में बाण गंगा, चरण पादुका और अर्धकुमारी जैसे विश्राम स्थल आते हैं।
- नवरात्रि के समय यहाँ भक्तों की संख्या विशेष रूप से बढ़ती है।