गरुड़ पुराण में भारत की सात पुरियों का उल्लेख आता है — अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, काञ्ची, अवंतिका और द्वारका। इन्हें परंपरा में सप्त पुरी कहा जाता रहा है। अवंतिका अर्थात् उज्जैन इन्हीं में से एक है।
स्कंद पुराण के अवंतिका खंड में इस नगरी का विस्तृत वर्णन मिलता है। प्राचीन काल में यह अवंती जनपद की राजधानी मानी जाती थी। यह शिप्रा नदी के तट पर बसी हुई है।
महाभारत और पुराण ग्रंथों में उज्जैन का उल्लेख शिक्षा और व्यापार के प्राचीन केंद्र के रूप में मिलता है। परंपरा के अनुसार यहाँ सांदीपनि ऋषि का आश्रम था, जहाँ अध्ययन की व्यवस्था थी।
पहली शताब्दी के आसपास उज्जैन को भारत के प्राचीन खगोलीय केंद्र के रूप में भी जाना जाता रहा है। यहाँ से गुज़रने वाली देशांतर रेखा को प्राचीन भारतीय खगोलशास्त्र में विशेष स्थान प्राप्त है।
गरुड़ पुराण में अवंतिका (उज्जैन) को भारत की सात मोक्षदायिनी पुरियों में से एक बताया गया है।
उज्जैन भारत के चार कुंभ मेला स्थलों में से एक है। अन्य तीन हैं — प्रयागराज, हरिद्वार और नासिक। हर बारह वर्षों में यहाँ सिंहस्थ कुंभ मेला होता है, जब शिप्रा नदी के तट पर बड़ी संख्या में भक्त एकत्र होते हैं।
शहर में कई प्राचीन मंदिर, घाट और आश्रम हैं। शिप्रा के रामघाट पर सुबह और शाम के दृश्य विशेष रूप से शांत माने जाते रहे हैं। उज्जैन का इतिहास दो हज़ार वर्षों से अधिक पुराना माना जाता है।
- उज्जैन में शिप्रा नदी के कई घाट हैं — राम घाट, गऊ घाट और अन्य।
- परंपरा में भक्त शिप्रा में स्नान कर के शहर के मंदिरों में दर्शन के लिए जाते आए हैं।
- शहर वर्ष भर भक्तों और यात्रियों के लिए खुला रहता है।
- हर बारह वर्ष में सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन होता है।