वैष्णव तीर्थ

उडुपी

कर्नाटक के तटीय क्षेत्र का प्राचीन कृष्ण मंदिर
📍 उडुपी, कर्नाटक
स्थान
उडुपी, कर्नाटक का तटीय क्षेत्र
देवता
भगवान श्री कृष्ण (बालकृष्ण)
स्थापना परंपरा
13वीं शताब्दी, मध्वाचार्य द्वारा
📖 मध्वाचार्य परंपरा और स्थानीय स्थल पुराण

उडुपी का श्री कृष्ण मठ 13वीं शताब्दी की परंपरा से जुड़ा माना जाता है। आचार्य मध्वाचार्य (1238–1317) द्वारा इस मठ की स्थापना की गई थी, ऐसा परंपरा में माना जाता रहा है।

मध्वाचार्य दक्षिण भारत के प्रसिद्ध वैष्णव आचार्यों में से एक थे। उन्होंने भगवद्गीता, ब्रह्मसूत्र और उपनिषदों पर भाष्य लिखे। उनकी दार्शनिक परंपरा को द्वैत वेदांत कहा गया है।

मंदिर की परंपरा के अनुसार मुख्य विग्रह बालकृष्ण का है — हाथ में मथने की रस्सी लिए हुए। यह विग्रह मंदिर के भीतर एक विशेष खिड़की से दिखाई देता है, जिसे कनकन खिंडी कहा जाता है।

उडुपी का श्री कृष्ण मठ 13वीं शताब्दी में आचार्य मध्वाचार्य की परंपरा से जुड़ा माना जाता है।

उडुपी कर्नाटक के पश्चिमी तटीय क्षेत्र में स्थित है। यह क्षेत्र अपनी हरियाली, नारियल के पेड़ों और समुद्र तटों के लिए जाना जाता है। मंदिर का स्थापत्य दक्षिण भारत की पारंपरिक शैली में है।

मंदिर के आसपास कई मठ और अष्टमठ परंपरा के केंद्र हैं। मंदिर परिसर में एक छोटा सा सरोवर भी है, जिसे मधवा सरोवर कहा जाता है। परंपरा में भक्त इसमें स्नान कर के दर्शन के लिए जाते आए हैं।

स्थापना परंपरा
13वीं शताब्दी, मध्वाचार्य
दार्शनिक परंपरा
द्वैत वेदांत
विशेष
कनकन खिंडी से मुख्य विग्रह दर्शन
सरोवर
मंदिर परिसर में मधवा सरोवर
✈️
हवाई मार्ग
मैंगलोर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लगभग 60 किलोमीटर दूर है। यहाँ से टैक्सी और बस सेवा उपलब्ध है।
🚂
रेल मार्ग
उडुपी रेलवे स्टेशन शहर के केंद्र में है। कोंकण रेलवे के मार्ग पर स्थित। मुंबई, गोवा और मैंगलोर से सीधी गाड़ियाँ चलती हैं।
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सड़क मार्ग
मैंगलोर से लगभग 60 किलोमीटर, बंगलुरु से लगभग 400 किलोमीटर। कर्नाटक राज्य परिवहन की बसें नियमित चलती हैं।
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विशेष
मंदिर शहर के केंद्र में — रेलवे स्टेशन से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर।