शैव तीर्थ

तंजावुर (बृहदीश्वर)

कावेरी डेल्टा में स्थित चोल काल का प्राचीन शैव मंदिर
📍 कावेरी डेल्टा क्षेत्र, तमिलनाडु
स्थान
तंजावुर, तमिलनाडु
मुख्य देवता
बृहदीश्वर शिव (पेरुवुडैयार)
निर्माण काल
लगभग 1010 ईस्वी, चोल काल
📖 चोल काल परंपरा (1010 CE) — पेरिय कोविल शैव स्थापत्य

शैव परंपरा में बृहदीश्वर का अर्थ है — महान ईश्वर। यहाँ भगवान शिव बृहदीश्वर के रूप में पूजे जाते रहे हैं। तमिल में यह मंदिर 'पेरिय कोविल' अर्थात् बड़ा मंदिर कहलाता है।

लगभग 1010 ईस्वी में चोल काल में राजराज चोल प्रथम ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। यह दक्षिण भारत के शैव मंदिरों में एक प्रमुख स्थान माना जाता रहा है। एक हज़ार वर्षों से अधिक समय से यहाँ शिव की निरंतर पूजा होती आई है।

मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक विशाल नंदी की मूर्ति है। यह मूर्ति एकल पत्थर को तराश कर बनाई गई मानी जाती है। भक्त पहले नंदी के दर्शन करते हैं, फिर भगवान शिव के पास जाते हैं।

स्थानीय परंपरा में कहा जाता है कि मंदिर के मुख्य विमानम की छाया दोपहर के समय भूमि पर नहीं पड़ती। यह बात चोल काल के कारीगरों की कुशलता की याद दिलाती है। सदियों से यह बात भक्तों और यात्रियों के बीच चर्चा में रही है।

एक हज़ार वर्षों से अधिक समय से बृहदीश्वर शिव यहाँ चोल शैव परंपरा के केंद्र में रहे हैं।

तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर चोल काल की शैव भक्ति परंपरा का एक प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है। द्रविड़ शैली में बना यह मंदिर अपनी 216 फीट ऊँची विमानम संरचना के लिए जाना जाता है। विमानम के शीर्ष पर ग्रेनाइट का एक विशाल पत्थर रखा गया है।

कावेरी डेल्टा के इस क्षेत्र में सुबह के समय मंदिर की घंटियाँ दूर तक सुनाई देती हैं। भक्त यहाँ पारंपरिक प्रदक्षिणा करते हैं और नंदी व बृहदीश्वर शिव के दर्शन करते हैं। यह स्थान दक्षिण भारत के शैव तीर्थयात्रा मार्गों में शामिल रहा है।

निर्माण काल
लगभग 1010 ईस्वी, चोल काल
विमानम ऊँचाई
लगभग 216 फीट (द्रविड़ शैली)
विशाल नंदी
एकल ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित मूर्ति
स्थापत्य
द्रविड़ शैली का पत्थर का मंदिर
✈️
हवाई मार्ग
तिरुचिरापल्ली (त्रिची) हवाई अड्डा लगभग 60 किलोमीटर दूर है। चेन्नई हवाई अड्डा लगभग 340 किलोमीटर पर है।
🚂
रेल मार्ग
तंजावुर रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर दूर है। चेन्नई, त्रिची और मदुरै से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
🚗
सड़क मार्ग
राष्ट्रीय राजमार्ग से तंजावुर अच्छी तरह जुड़ा है। त्रिची से लगभग 60 किलोमीटर और चेन्नई से लगभग 340 किलोमीटर।
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विशेष
तंजावुर शहर में ऑटो और स्थानीय बस से मंदिर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है।