पद्म पुराण के पुष्कर माहात्म्य में इस सरोवर का विस्तृत वर्णन मिलता है। पुराण के अनुसार पुष्कर सरोवर ब्रह्मा से जुड़ा हुआ माना जाता रहा है।
महाभारत में भी पुष्कर का उल्लेख तीर्थ के रूप में आता है। यह उन प्राचीन तीर्थों में से एक है जिनका वर्णन कई पुराण ग्रंथों में मिलता है।
सरोवर के चारों ओर बावन घाट हैं। प्रत्येक घाट का अपना नाम और परंपरा है। ब्रह्मा का मुख्य मंदिर सरोवर के तट पर स्थित है।
पद्म पुराण के पुष्कर माहात्म्य में इस सरोवर को ब्रह्मा से जुड़े तीर्थ के रूप में वर्णित किया गया है।
पुष्कर भारत के उन दुर्लभ तीर्थों में से एक है जहाँ ब्रह्मा का मुख्य मंदिर स्थित है। ब्रह्मा को समर्पित मंदिर भारत में बहुत कम हैं, इसलिए यह स्थान विशेष माना जाता रहा है।
ब्रह्मा मंदिर का शिखर अपने विशिष्ट लाल रंग के लिए जाना जाता है। मंदिर के अंदर संगमरमर का फर्श है। सरोवर के चारों ओर पहाड़ियाँ और शांत वातावरण इसे एक विशेष अनुभव देते हैं।
- मंदिर वर्ष भर खुला रहता है। भक्त यहाँ रोज़ दर्शन के लिए आते आए हैं।
- परंपरा में भक्त सरोवर में स्नान कर के मंदिर में दर्शन के लिए जाते आए हैं।
- बावन घाटों में से प्रत्येक का अपना ऐतिहासिक नाम और परंपरा है।
- कार्तिक पूर्णिमा के समय यहाँ विशेष परंपरा देखी जाती है।