नदी संगम

त्रिवेणी संगम

गंगा, यमुना और सरस्वती का पवित्र संगम
📍 प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
स्थान
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
नदियाँ
गंगा, यमुना और परंपरागत सरस्वती
विशेष
कुंभ मेला के चार स्थलों में से एक
📖 पद्म पुराण, मत्स्य पुराण और स्कंद पुराण का प्रयाग माहात्म्य

पद्म पुराण, मत्स्य पुराण और स्कंद पुराण — तीनों में प्रयाग माहात्म्य का प्रकरण आता है। इन ग्रंथों में प्रयाग को सबसे पुराने तीर्थों में गिना जाता रहा है।

महाभारत में भी प्रयाग का उल्लेख तीर्थ के रूप में मिलता है। यहाँ दो भौतिक नदियों — गंगा और यमुना — का संगम होता है। परंपरा में एक तीसरी नदी सरस्वती का भी इस संगम में मिलना माना जाता रहा है।

लगभग दो हज़ार वर्षों से यह स्थान निरंतर तीर्थ के रूप में पूजनीय रहा है। पुराण ग्रंथों में इसे तीर्थराज के नाम से भी पुकारा गया है।

पुराण ग्रंथों में प्रयाग को तीर्थराज कहा गया है — गंगा, यमुना और परंपरागत सरस्वती के संगम का स्थान।

त्रिवेणी संगम भारत के चार कुंभ मेला स्थलों में से एक है। अन्य तीन हैं — हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। हर बारह वर्षों में यहाँ महा कुंभ मेला होता है, जो विश्व के सबसे बड़े शांतिपूर्ण धार्मिक समागमों में से एक माना जाता है।

संगम स्थल पर गंगा का साफ़ पानी और यमुना का गहरा पानी एक साथ मिलते हुए दिखाई देते हैं — यह दृश्य अपने आप में विशेष है। तट पर अकबर का प्राचीन क़िला भी है, जो ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

नदियाँ
गंगा, यमुना और परंपरागत सरस्वती
कुंभ मेला
चार कुंभ स्थलों में से एक
प्राचीनतम संदर्भ
पद्म, मत्स्य और स्कंद पुराण
विशेष
विश्व के सबसे बड़े धार्मिक समागमों में से एक
✈️
हवाई मार्ग
प्रयागराज (बमरौली) हवाई अड्डा शहर के पास है। लखनऊ और वाराणसी हवाई अड्डे भी सुलभ हैं।
🚂
रेल मार्ग
प्रयागराज जंक्शन शहर के केंद्र में है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और सभी प्रमुख शहरों से सीधी गाड़ियाँ चलती हैं।
🚗
सड़क मार्ग
लखनऊ से लगभग 200 किलोमीटर, वाराणसी से लगभग 120 किलोमीटर। राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा हुआ है।
विशेष
संगम तक पहुँचने के लिए तट से नाव की सेवा परंपरागत रूप से उपलब्ध रही है।