वैष्णव तीर्थ

पंढरपुर

भीमा नदी के तट पर विट्ठल का प्राचीन मंदिर
📍 सोलापुर ज़िला, महाराष्ट्र
स्थान
भीमा नदी के तट पर, सोलापुर ज़िला
देवता
भगवान विट्ठल और रुक्मिणी
नदी
भीमा (यहाँ चन्द्रभागा कहलाती है)
📖 स्कंद पुराण और संत ज्ञानेश्वर की 'ज्ञानेश्वरी'

स्कंद पुराण में पंढरपुर का उल्लेख विट्ठल के तीर्थ के रूप में आता है। परंपरा में विट्ठल को विष्णु और कृष्ण का ही एक स्वरूप माना जाता रहा है।

मंदिर भीमा नदी के तट पर स्थित है। यहाँ नदी का स्वरूप अर्धचंद्र की तरह है, इसलिए इसे चन्द्रभागा भी कहा जाता है। मुख्य मूर्ति में विट्ठल एक ईंट पर खड़े दिखाई देते हैं।

13वीं शताब्दी में संत ज्ञानेश्वर ने 'ज्ञानेश्वरी' नामक मराठी ग्रंथ रचा। इसमें भगवद्गीता की मराठी भाषा में व्याख्या है। यह ग्रंथ पंढरपुर परंपरा से जुड़ा माना जाता रहा है।

स्कंद पुराण में पंढरपुर को विट्ठल के तीर्थ के रूप में वर्णित किया गया है।

पंढरपुर महाराष्ट्र के सबसे पुराने वैष्णव तीर्थों में से एक माना जाता रहा है। मंदिर का स्थापत्य हेमाडपंती शैली का है, जो महाराष्ट्र की एक प्राचीन मंदिर निर्माण शैली है।

परंपरा में भक्त पैदल यात्रा करके पंढरपुर आते रहे हैं। यह पैदल यात्रा महाराष्ट्र की एक प्राचीन परंपरा रही है। मंदिर परिसर में कई मंडप और मुख्य गर्भगृह है, जहाँ विट्ठल और रुक्मिणी की मूर्तियाँ स्थापित हैं।

स्थापत्य
हेमाडपंती शैली का पत्थर का मंदिर
नदी
भीमा नदी (यहाँ चन्द्रभागा कहलाती है)
प्राचीनतम संदर्भ
स्कंद पुराण
विशेष
विट्ठल एक ईंट पर खड़े दिखाई देते हैं
✈️
हवाई मार्ग
पुणे हवाई अड्डा लगभग 210 किलोमीटर दूर है। हैदराबाद हवाई अड्डा भी सुलभ है।
🚂
रेल मार्ग
पंढरपुर रेलवे स्टेशन शहर में है। सोलापुर से लगभग 70 किलोमीटर दूर। मुंबई और पुणे से सीधी गाड़ियाँ चलती हैं।
🚗
सड़क मार्ग
पुणे से लगभग 210 किलोमीटर, सोलापुर से लगभग 70 किलोमीटर। महाराष्ट्र राज्य की बसें नियमित चलती हैं।
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विशेष
मंदिर भीमा नदी के तट पर — नदी और मंदिर पास-पास हैं।