वाल्मीकि रामायण के अरण्य कांड में पंचवटी वन का विस्तृत वर्णन मिलता है। परंपरा के अनुसार भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपने वनवास काल का एक भाग इसी क्षेत्र में बिताया था।
अरण्य कांड में लिखा है कि यह क्षेत्र गोदावरी नदी के तट पर स्थित था। चारों ओर घना वन, पाँच विशेष वट वृक्ष (इसी कारण नाम 'पंचवटी'), और शांत प्राकृतिक वातावरण का वर्णन मिलता है।
वाल्मीकि रामायण में शूर्पणखा के आगमन, लक्ष्मण रेखा और माता सीता के हरण की कथा इसी पंचवटी क्षेत्र से जुड़ी हुई है। यहीं से राम-रावण प्रसंग की प्रमुख घटनाओं की शुरुआत मानी जाती रही है।
आज का नासिक शहर गोदावरी के तट पर बसा हुआ है। पंचवटी नासिक शहर का एक प्राचीन क्षेत्र है, जो गोदावरी के किनारे स्थित है। नासिक के पास त्र्यंबकेश्वर भी है, जो गोदावरी का उद्गम स्थल माना जाता रहा है। त्र्यंबकेश्वर का वर्णन इस वेबसाइट पर एक अलग पृष्ठ पर दिया गया है।
वाल्मीकि रामायण के अरण्य कांड में पंचवटी को राम-सीता-लक्ष्मण के वनवास काल का स्थल बताया गया है।
नासिक भारत के चार कुंभ मेला स्थलों में से एक है। अन्य तीन हैं — प्रयागराज, हरिद्वार और उज्जैन। नासिक का कुंभ मेला गोदावरी नदी के तट पर होता है, इसी कारण इसे गोदावरी कुंभ या सिंहस्थ भी कहा जाता रहा है।
गोदावरी के नासिक क्षेत्र में कई घाट हैं — रामकुंड सबसे प्रसिद्ध है। परंपरा में भक्त यहाँ स्नान कर के पंचवटी क्षेत्र के पुराने मंदिरों के दर्शन के लिए जाते आए हैं। पंचवटी क्षेत्र में सीता गुफा और अन्य परंपरागत स्थल रहे हैं।
- पंचवटी क्षेत्र गोदावरी के तट पर स्थित है — नासिक शहर का प्राचीन भाग।
- परंपरा में भक्त गोदावरी में स्नान कर के पंचवटी के मंदिरों के दर्शन के लिए जाते आए हैं।
- रामकुंड पर स्नान की परंपरा बहुत पुरानी रही है।
- हर बारह वर्ष में सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन होता है।