देवी तीर्थ

कन्याकुमारी

तीन सागरों के संगम पर स्थित माता कन्या कुमारी का प्राचीन देवी तीर्थ
📍 तमिलनाडु का दक्षिणी छोर
स्थान
कन्याकुमारी, तमिलनाडु
देवी
माता कन्या कुमारी (पार्वती)
विशेष
तीन सागरों का संगम — अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर
📖 देवी भागवत पुराण और स्कंद पुराण — बाणासुर कथा

देवी भागवत पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, बाणासुर नामक असुर को एक कन्या के हाथों ही मृत्यु का वरदान प्राप्त था। उसने यही सोचकर निश्चिंत होकर अत्याचार किया — वह मानता था कि कोई कन्या उसे नहीं मार सकती।

तब माता पार्वती ने कन्या कुमारी का रूप धारण किया। वे इस भूखंड के दक्षिणी छोर पर आईं और भगवान शिव से विवाह की कामना लेकर तपस्या करने लगीं। कहा जाता है कि विवाह की तैयारी भी हुई — अन्न पकाया गया, मेहमानों की प्रतीक्षा हुई।

परंतु देव-संकल्प से वह विवाह संपन्न न हो सका। देवी यहीं शाश्वत कन्या के रूप में विराजमान रहीं। जो अन्न विवाह के लिए तैयार था, वह यहाँ के तटों की रंग-बिरंगी रेत के रूप में आज भी दिखता है — ऐसी परंपरागत मान्यता चली आती है।

जब बाणासुर कन्या कुमारी को बंदी बनाने आया, तो देवी ने उसका वध किया। स्कंद पुराण में बताया गया है कि देवी ने बाणासुर का वध अपने शस्त्रों से किया। तब से यह स्थान माता कन्या कुमारी के तीर्थ के रूप में पूजित होता आया है।

देवी भागवत पुराण और स्कंद पुराण में इस स्थान का उल्लेख माता कन्या कुमारी की तपोभूमि के रूप में मिलता है।

यह तीर्थ शक्ति परंपरा में प्राचीन काल से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। यहाँ अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर — तीनों का जल मिलता है। पुराणों की परंपरा में इसे त्रिसमुद्र संगम कहा जाता है और इसे पवित्र माना जाता रहा है।

भक्त यहाँ सुबह के समय जल में खड़े होकर देवी का स्मरण करते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय तीनों सागरों के जल पर प्रकाश का जो दृश्य बनता है, वह यहाँ आने वालों के लिए स्मरणीय रहता है। मंदिर के गर्भगृह में माता कन्या कुमारी की मूर्ति प्राचीन परंपरा में स्थापित मानी जाती है।

पौराणिक उल्लेख
देवी भागवत पुराण और स्कंद पुराण
त्रिसमुद्र संगम
अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर का मिलन बिंदु
मुख्य देवी
माता कन्या कुमारी — पार्वती का कन्या रूप
प्राचीन परंपरा
शक्ति परंपरा में प्राचीन काल से पूजित
✈️
हवाई मार्ग
त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) हवाई अड्डा लगभग 90 किलोमीटर दूर है। वहाँ से बस और टैक्सी उपलब्ध हैं।
🚂
रेल मार्ग
कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन मंदिर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है। यहाँ चेन्नई, मुंबई और अन्य बड़े शहरों से सीधी गाड़ियाँ आती हैं।
🚗
सड़क मार्ग
राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा तमिलनाडु और केरल के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। त्रिवेंद्रम से लगभग 90 किलोमीटर।
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विशेष
कन्याकुमारी तटीय स्थान है। तीन सागरों का यह संगम-बिंदु मंदिर के निकट ही है।