गरुड़ पुराण में जिन सात पुरियों का उल्लेख है — अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, काञ्ची, अवंतिका और द्वारका — उनमें से काञ्ची दक्षिण भारत की एकमात्र पुरी है। परंपरा में इसे दक्षिण की काशी भी कहा जाता रहा है।
स्कंद पुराण की काञ्ची माहात्म्य परंपरा में इस नगरी का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह नगरी दक्षिण भारत की प्राचीन राजधानियों में से एक रही है।
आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने यहाँ कांची कामकोटि पीठ की स्थापना की थी, ऐसा परंपरा में माना जाता रहा है। यह उनके द्वारा स्थापित प्रमुख मठों में से एक माना जाता है।
कांचीपुरम की एक विशेषता यह रही है कि यहाँ शैव और वैष्णव — दोनों परंपराओं के प्राचीन मंदिर एक साथ विद्यमान हैं। एकाम्बरेश्वर मंदिर शैव परंपरा का है, और वरदराज पेरुमाल मंदिर वैष्णव परंपरा का।
गरुड़ पुराण में काञ्ची को सात मोक्षदायिनी पुरियों में से एक बताया गया है — दक्षिण भारत की एकमात्र सप्त पुरी।
कांचीपुरम तमिलनाडु का एक ऐतिहासिक नगर है, जिसे परंपरा में 'हज़ार मंदिरों की नगरी' भी कहा जाता रहा है। यहाँ शैव और वैष्णव दोनों परंपराओं के प्राचीन मंदिर एक साथ विद्यमान हैं, और यह शहर की एक विशेष पहचान रही है।
शहर अपने पारंपरिक रेशम वस्त्र उद्योग के लिए भी जाना जाता है। कांचीपुरम साड़ी भारत की प्रसिद्ध पारंपरिक साड़ियों में से एक मानी जाती रही है। मंदिरों का स्थापत्य द्रविड़ शैली का है, जिसमें ऊँचे गोपुरम और विस्तृत प्रांगण देखे जा सकते हैं।
- शहर में शैव और वैष्णव — दोनों परंपराओं के कई प्राचीन मंदिर हैं।
- एकाम्बरेश्वर मंदिर शैव परंपरा का मुख्य मंदिर माना जाता रहा है।
- वरदराज पेरुमाल मंदिर वैष्णव परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है।
- कांची कामकोटि पीठ भी शहर में स्थित है।