देवी तीर्थ

कालीघाट

आदि गंगा के तट पर स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक
📍 आदि गंगा तट, कोलकाता, पश्चिम बंगाल
स्थान
आदि गंगा तट, कोलकाता
देवी
माता काली (भद्रकाली)
परंपरा
51 शक्तिपीठों में से एक
📖 देवी भागवत पुराण और कालिका पुराण — 51 शक्तिपीठ परंपरा

देवी भागवत पुराण और कालिका पुराण के अनुसार, एक प्राचीन काल की बात है। दक्ष प्रजापति ने एक महान यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने भगवान शिव का अनादर किया। उनकी पुत्री सती — जो माँ पार्वती का पूर्व-जन्म रूप थीं — यह अपमान सह न सकीं। वे उसी यज्ञ की अग्नि में समा गईं।

भगवान शिव अत्यंत व्याकुल हो उठे। वे सती को लिए ब्रह्मांड में भटकते रहे। तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 अंग अलग किए। जहाँ-जहाँ वे अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ बन गए।

कालिका पुराण की परंपरा के अनुसार, कालीघाट वह स्थान है जहाँ सती का एक अंग इस धरती पर गिरा। यहाँ आदि गंगा के तट पर माता काली का वास माना जाता है। वे भद्रकाली और दक्षिणकाली के रूप में पूजी जाती हैं।

माता काली का स्वरूप रौद्र दिखता है, पर भक्त उन्हें सदा रक्षक के रूप में जानते हैं। कालिका पुराण में उनका वर्णन है — वे देवताओं की रक्षा के लिए प्रकट हुईं। उनका रौद्र रूप अधर्म का अंत करने के लिए है, भक्तों की रक्षा के लिए है।

देवी भागवत पुराण और कालिका पुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है — कालीघाट उनमें से एक पवित्र पीठ माना जाता है।

कालीघाट परंपरागत रूप से शाक्त परंपरा में महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। 51 शक्तिपीठों में यह पश्चिम बंगाल का एक प्रमुख तीर्थ है। आदि गंगा — जो हुगली नदी की एक पुरानी धारा है — के तट पर स्थित होने के कारण इस स्थान का अपना एक विशेष भूगोल भी है।

भक्त यहाँ दूर-दूर से माता के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के भीतर फूल, दीप और प्रसाद चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। सुबह और शाम की आरती के समय मंदिर में घंटे और शंख की आवाज़ दूर तक सुनाई देती है।

51 शक्तिपीठ में स्थान
सती का एक अंग यहाँ गिरा — कालिका पुराण परंपरा के अनुसार
पौराणिक उल्लेख
देवी भागवत पुराण और कालिका पुराण
मुख्य देवी
माता काली — भद्रकाली और दक्षिणकाली रूप में पूजित
विशेष
आदि गंगा (हुगली की पुरानी धारा) के तट पर स्थित
✈️
हवाई मार्ग
नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, कोलकाता — लगभग 20 किलोमीटर दूर।
🚇
मेट्रो मार्ग
कालीघाट मेट्रो स्टेशन मंदिर के निकट है। कोलकाता मेट्रो की ब्लू लाइन से सीधे पहुँचा जा सकता है।
🚗
सड़क मार्ग
राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा कोलकाता शहर के भीतर स्थित है। बस, टैक्सी और ऑटो उपलब्ध रहते हैं।
🚂
रेल मार्ग
हावड़ा और सियालदह — कोलकाता के दोनों प्रमुख रेलवे स्टेशन — मंदिर से लगभग 10–15 किलोमीटर की दूरी पर हैं।