सप्त पुरी

हरिद्वार

जहाँ गंगा पर्वतों से उतरकर मैदान में प्रवेश करती हैं
📍 हरिद्वार, उत्तराखंड
स्थान
गंगा के तट पर, उत्तराखंड
प्राचीन नाम
माया, मायापुरी
विशेष
सात मोक्षदायिनी पुरियों में से एक
📖 गरुड़ पुराण और स्कंद पुराण का हरिद्वार माहात्म्य

गरुड़ पुराण में भारत की सात पुरियों का उल्लेख आता है — अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, काञ्ची, अवंतिका और द्वारका। इनमें से माया अर्थात् हरिद्वार उत्तर भारत की एक प्रमुख सप्त पुरी मानी जाती रही है।

परंपरा के अनुसार हरिद्वार वही स्थान है जहाँ गंगा नदी हिमालय के पर्वतों से उतरकर मैदानी क्षेत्रों में प्रवेश करती है। यहाँ नदी का स्वरूप तेज़ और ठंडा रहता है। स्कंद पुराण के हरिद्वार माहात्म्य में इस स्थान का विस्तृत वर्णन मिलता है।

शहर के मुख्य घाट को हर-की-पौड़ी कहा जाता है। परंपरा में इसे ब्रह्मकुंड भी कहा गया है। प्राचीन ग्रंथों में यह स्थान उन चार स्थानों में से एक माना जाता रहा है जहाँ पुराण कथा के अनुसार अमृत की कुछ बूँदें गिरी थीं।

हरिद्वार भारत के चार कुंभ मेला स्थलों में से एक है। अन्य तीन हैं — प्रयागराज, उज्जैन और नासिक। यहाँ हर बारह वर्षों में महाकुंभ और हर छह वर्षों में अर्ध कुंभ मेले की परंपरा रही है।

गरुड़ पुराण में 'माया' (हरिद्वार) को भारत की सात मोक्षदायिनी पुरियों में से एक बताया गया है।

हरिद्वार उत्तर भारत के सबसे पुराने तीर्थों में से एक माना जाता रहा है। यहाँ गंगा के कई घाट हैं, जिनमें हर-की-पौड़ी सबसे प्रसिद्ध है। शाम के समय गंगा आरती की परंपरा यहाँ बहुत पुरानी रही है।

शहर के पास मनसा देवी और चंडी देवी की पहाड़ियाँ भी हैं। हरिद्वार से आगे ऋषिकेश, देवप्रयाग और फिर बद्रीनाथ-केदारनाथ तक जाने का पारंपरिक यात्रा मार्ग रहा है। इसी कारण हरिद्वार को चार धाम यात्रा का प्रवेश द्वार भी कहा जाता रहा है।

प्राचीन नाम
माया, मायापुरी
नदी
गंगा — पर्वतों से मैदान में प्रवेश
मुख्य घाट
हर-की-पौड़ी (ब्रह्मकुंड)
कुंभ मेला
चार कुंभ स्थलों में से एक
✈️
हवाई मार्ग
देहरादून (जॉली ग्रांट) हवाई अड्डा लगभग 35 किलोमीटर दूर है। दिल्ली हवाई अड्डा लगभग 220 किलोमीटर पर पड़ता है।
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रेल मार्ग
हरिद्वार जंक्शन शहर के केंद्र में है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और अन्य प्रमुख शहरों से सीधी गाड़ियाँ चलती हैं।
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सड़क मार्ग
दिल्ली से लगभग 220 किलोमीटर, देहरादून से लगभग 55 किलोमीटर। राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा हुआ है।
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विशेष
हरिद्वार से ऋषिकेश लगभग 25 किलोमीटर — दोनों शहर गंगा के तट पर पास-पास हैं।