शैव तीर्थ

गोकर्ण (महाबलेश्वर)

अरब सागर के तट पर स्थित प्राचीन आत्म-लिंग तीर्थ
📍 अरब सागर तट, उत्तर कन्नड़ ज़िला, कर्नाटक
स्थान
अरब सागर तट, उत्तर कन्नड़ ज़िला
मुख्य देवता
महाबलेश्वर शिव
तटीय स्थिति
अरब सागर के किनारे
📖 स्कंद पुराण — आत्म-लिंग कथा; रामायण उत्तर कांड

स्कंद पुराण के अनुसार, रावण ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था। शिव ने उन्हें आत्म-लिंग — अपना स्वयं का लिंग — प्रदान किया। किंतु एक शर्त थी: यह लिंग लंका पहुँचने से पहले धरती पर नहीं रखा जाना चाहिए।

रावण आत्म-लिंग लेकर दक्षिण की ओर चले। देवताओं को चिंता हुई कि यदि यह लिंग लंका पहुँच गया, तो रावण अपराजेय हो जाएँगे। तब भगवान गणेश ने एक ग्वाले के बालक का रूप लेकर गोकर्ण के पास रावण को रोका।

संध्याकाल में रावण को अपनी दैनिक पूजा करनी थी। उन्होंने उस बालक से लिंग थामने को कहा। बालक ने कहा — 'यदि यह भारी हो जाए तो मैं रख दूँगा।' रावण के लौटने से पहले ही लिंग धरती पर रख दिया गया।

रावण ने लिंग उठाने का बहुत प्रयास किया। लिंग का ऊपरी भाग थोड़ा मुड़ गया — इसीलिए इसे महाबलेश्वर कहा जाता है। वह आत्म-लिंग आज भी गोकर्ण में स्थापित है।

स्कंद पुराण में गोकर्ण के महाबलेश्वर लिंग को आत्म-लिंग बताया गया है — शिव का स्वयं का लिंग।

गोकर्ण परंपरागत रूप से शैव तीर्थों में महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। पुरानी परंपरा में इसे सप्त मुक्ति स्थलों में से एक माना जाता रहा है। अरब सागर के तट पर स्थित होने के कारण यहाँ तटीय तीर्थ-स्नान की भी पुरानी परंपरा है।

गोकर्ण नाम की एक व्याख्या स्कंद पुराण में मिलती है — परंपरा के अनुसार यहाँ शिव गाय के कान (गो-कर्ण) से प्रकट हुए थे। मंदिर की सुबह की आरती के समय समुद्र का शांत वातावरण और घंटियों की आवाज़ एक साथ सुनाई देती है।

पौराणिक उल्लेख
स्कंद पुराण और रामायण उत्तर कांड
विशेष
आत्म-लिंग — स्कंद पुराण के अनुसार शिव द्वारा स्वयं प्रदत्त
तटीय स्थिति
अरब सागर के किनारे, कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ ज़िले में
परंपरा
प्राचीन सप्त मुक्ति स्थलों में से एक माना जाता रहा है
✈️
हवाई मार्ग
गोवा का डाबोलिम हवाई अड्डा लगभग 140 किलोमीटर दूर है। वहाँ से सड़क मार्ग द्वारा गोकर्ण पहुँचा जा सकता है।
🚂
रेल मार्ग
गोकर्ण रोड रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 8 किलोमीटर दूर है। यहाँ से ऑटो और टैक्सियाँ उपलब्ध रहती हैं।
🚗
सड़क मार्ग
मंगलुरु से राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा लगभग 230 किलोमीटर। कारवार से लगभग 60 किलोमीटर।
🛕
निकटतम नगर
कारवार निकटतम बड़ा नगर है — लगभग 60 किलोमीटर। होनावर भी पास में पड़ता है।