तमिल शैव परंपरा में भगवान शिव के पाँच विशेष तीर्थों का वर्णन मिलता है, जिन्हें पंच भूत स्थल कहा जाता है। इन पाँच स्थलों में शिव का संबंध पाँच महाभूतों — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — से जोड़ा जाता रहा है।
चिदम्बरम इन पाँच में से आकाश तत्व का स्थल माना जाता है। परंपरा में यहाँ शिव का स्वरूप किसी मूर्ति या रूप में नहीं, बल्कि निराकार आकाश के रूप में पूजा जाता रहा है — इसे चिदम्बर रहस्य भी कहा गया है।
मंदिर का मुख्य स्वरूप नटराज का है — नृत्य करते हुए शिव का रूप। परंपरा में माना जाता रहा है कि यहाँ शिव ने आनंद तांडव नामक नृत्य किया था। स्कंद पुराण में इस स्थान का उल्लेख मिलता है।
तमिल शैव परंपरा में चिदम्बरम को पंच भूत स्थलों में आकाश तत्व का तीर्थ माना गया है।
चिदम्बरम मंदिर दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन और विस्तृत शैव मंदिरों में से एक है। मंदिर परिसर लगभग 40 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें चार मुख्य गोपुरम, कई प्रांगण और अनेक उप-मंदिर हैं।
मंदिर का स्थापत्य द्रविड़ शैली का है। शिखरों पर पारंपरिक तमिल मूर्तिकला के उदाहरण देखे जा सकते हैं। परंपरा में चिदम्बरम को 'कोयिल' कहा जाता रहा है, जिसका अर्थ तमिल में केवल 'मंदिर' है — इतना प्रसिद्ध कि इसे नाम की ज़रूरत नहीं।
- मंदिर वर्ष भर खुला रहता है और भक्त यहाँ रोज़ दर्शन के लिए आते आए हैं।
- मंदिर में नटराज मुख्य विग्रह हैं — नृत्य करते हुए शिव का स्वरूप।
- परंपरा में यहाँ शिव का आकाश तत्व के रूप में दर्शन माना जाता रहा है।
- मंदिर के चार मुख्य गोपुरम दक्षिण भारतीय स्थापत्य के विशेष उदाहरण हैं।