इस भाग में फल-श्रुति जारी है — विष्णु सहस्रनाम के नियमित पाठ से प्राप्त होने वाले लाभ और भगवान वासुदेव की सर्वव्यापकता का वर्णन है। सम्पूर्ण जगत, ज्ञान-विज्ञान, वेद-शास्त्र — सब नारायण से ही उत्पन्न हैं।
📖 महाभारत, अनुशासन पर्व — विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र
81
वासुदेवाश्रयो मर्त्यो वासुदेवपरायणः ।
सर्वपापविशुद्धात्मा याति ब्रह्म सनातनम् ॥
वासुदेवाश्रयः
वासुदेव का आश्रय लेने वाला
मर्त्यः
नश्वर मनुष्य
वासुदेवपरायणः
वासुदेव में ही लीन
सर्वपापविशुद्धात्मा
सब पापों से शुद्ध आत्मा वाला
याति
प्राप्त करता है
ब्रह्म सनातनम्
सनातन ब्रह्म को
वासुदेव का आश्रय लेने वाला, उनमें लीन मनुष्य सब पापों से शुद्ध होकर सनातन ब्रह्म को प्राप्त करता है।
82
न वासुदेवभक्तानामशुभं विद्यते क्वचित् ।
जन्ममृत्युजराव्याधिभयं नैवोपजायते ॥
न
नहीं
वासुदेवभक्तानाम्
वासुदेव के भक्तों को
अशुभम्
कोई अशुभ
विद्यते
होता
क्वचित्
कभी भी
जन्ममृत्युजराव्याधिभयम्
जन्म-मृत्यु-बुढ़ापा-रोग का भय
न उपजायते
उत्पन्न नहीं होता
वासुदेव के भक्तों को कभी कोई अशुभ नहीं होता। उन्हें जन्म, मृत्यु, बुढ़ापे और रोग का भय नहीं रहता।
83
इमं स्तवमधीयानः श्रद्धाभक्तिसमन्वितः ।
युज्येतात्मसुखक्षान्तिश्रीधृतिस्मृतिकीर्तिभिः ॥
इमम् स्तवम्
इस स्तुति को
अधीयानः
पढ़ने वाला
श्रद्धाभक्तिसमन्वितः
श्रद्धा और भक्ति से युक्त
युज्येत
प्राप्त करे
आत्मसुखक्षान्तिश्रीधृतिस्मृतिकीर्तिभिः
आत्मसुख, क्षमा, सम्पत्ति, धैर्य, स्मृति और कीर्ति
जो श्रद्धा और भक्ति से इस स्तुति को पढ़ता है, उसे आत्मसुख, क्षमा, सम्पत्ति, धैर्य, स्मृति और कीर्ति — ये छह गुण प्राप्त होते हैं।
84
न क्रोधो न च मात्सर्यं न लोभो नाशुभा मतिः ।
भवन्ति कृतपुण्यानां भक्तानां पुरुषोत्तमे ॥
न क्रोधः
क्रोध नहीं
न मात्सर्यम्
ईर्ष्या नहीं
न लोभः
लोभ नहीं
न अशुभा मतिः
अशुभ बुद्धि नहीं
कृतपुण्यानाम्
पुण्यकर्मियों के
भक्तानाम्
भक्तों के
पुरुषोत्तमे
पुरुषोत्तम भगवान में
पुरुषोत्तम भगवान के पुण्यवान भक्तों में क्रोध, ईर्ष्या, लोभ और अशुभ बुद्धि — ये दोष नहीं रहते।
85
द्यौः सचन्द्रार्कनक्षत्रा खं दिशो भूर्महोदधिः ।
वासुदेवस्य वीर्येण विधृतानि महात्मनः ॥
द्यौः
आकाश
सचन्द्रार्कनक्षत्रा
चन्द्रमा, सूर्य और नक्षत्रों सहित
खम्
अन्तरिक्ष
दिशः
दिशाएँ
भूः
पृथ्वी
महोदधिः
महान सागर
वासुदेवस्य
वासुदेव के
वीर्येण
पराक्रम से
विधृतानि
धारण किये हुए हैं
चन्द्रमा-सूर्य-नक्षत्रों सहित आकाश, अन्तरिक्ष, दिशाएँ, पृथ्वी और महासागर — सब कुछ महात्मा वासुदेव के पराक्रम से धारण किये हुए हैं।
86
ससुरासुरगन्धर्वं सयक्षोरगराक्षसम् ।
जगद्वशे वर्ततेदं कृष्णस्य सचराचरम् ॥
ससुरासुरगन्धर्वम्
देव, असुर और गन्धर्वों सहित
सयक्षोरगराक्षसम्
यक्ष, नाग और राक्षसों सहित
जगत्
सम्पूर्ण जगत
वशे
वश में
वर्तते
रहता है
इदम्
यह
कृष्णस्य
श्रीकृष्ण के
सचराचरम्
चर और अचर सहित
देवता, असुर, गन्धर्व, यक्ष, नाग और राक्षसों सहित यह सम्पूर्ण चराचर जगत श्रीकृष्ण के वश में रहता है।
87
इन्द्रियाणि मनो बुद्धिः सत्त्वं तेजो बलं धृतिः ।
वासुदेवात्मकान्याहुः क्षेत्रं क्षेत्रज्ञ एव च ॥
इन्द्रियाणि
इन्द्रियाँ
मनः
मन
बुद्धिः
बुद्धि
सत्त्वम्
सत्त्वगुण
तेजः
तेज
बलम्
बल
धृतिः
धैर्य
वासुदेवात्मकानि
वासुदेव-स्वरूप हैं
आहुः
कहते हैं
क्षेत्रम्
शरीर (क्षेत्र)
क्षेत्रज्ञः
क्षेत्र का ज्ञाता (आत्मा)
इन्द्रियाँ, मन, बुद्धि, सत्त्व, तेज, बल, धैर्य — सब वासुदेव-स्वरूप हैं। शरीर और शरीर का ज्ञाता (आत्मा) — दोनों वासुदेव ही हैं।
88
सर्वागमानामाचारः प्रथमं परिकल्पते ।
आचारप्रभवो धर्मो धर्मस्य प्रभुरच्युतः ॥
सर्वागमानाम्
सब शास्त्रों का
आचारः
आचरण
प्रथमम्
सबसे पहले
परिकल्पते
निर्धारित किया गया है
आचारप्रभवः
आचरण से उत्पन्न
धर्मः
धर्म
धर्मस्य प्रभुः
धर्म के स्वामी
अच्युतः
अच्युत भगवान
सब शास्त्रों में सबसे पहले आचरण (सदाचार) निर्धारित किया गया है। धर्म आचरण से उत्पन्न होता है और धर्म के स्वामी अच्युत भगवान हैं।
89
ऋषयः पितरो देवा महाभूतानि धातवः ।
जङ्गमाजङ्गमं चेदं जगन्नारायणोद्भवम् ॥
ऋषयः
ऋषिगण
पितरः
पितृगण
देवाः
देवता
महाभूतानि
पंचमहाभूत
धातवः
धातुएँ
जङ्गमाजङ्गमम्
चर और अचर
इदम् जगत्
यह जगत
नारायणोद्भवम्
नारायण से उत्पन्न
ऋषि, पितर, देवता, पंचमहाभूत, धातुएँ और चर-अचर सम्पूर्ण जगत — सब नारायण से ही उत्पन्न हुए हैं।
90
योगो ज्ञानं तथा सांख्यं विद्याः शिल्पादि कर्म च ।
वेदाः शास्त्राणि विज्ञानमेतत्सर्वं जनार्दनात् ॥
योगः
योग
ज्ञानम्
ज्ञान
सांख्यम्
सांख्य दर्शन
विद्याः
विद्याएँ
शिल्पादि
शिल्प आदि कलाएँ
कर्म
कर्म
वेदाः
वेद
शास्त्राणि
शास्त्र
विज्ञानम्
विज्ञान
एतत् सर्वम्
यह सब
जनार्दनात्
जनार्दन (विष्णु) से
योग, ज्ञान, सांख्य, विद्याएँ, शिल्प-कलाएँ, कर्म, वेद, शास्त्र और विज्ञान — यह सब जनार्दन भगवान से ही उत्पन्न हुआ है।
संदर्भ
विष्णु सहस्रनाम · 9 / 11