महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह ने बाणों की शैय्या पर लेटे हुए युधिष्ठिर को विष्णु सहस्रनाम सुनाया। युधिष्ठिर ने पूछा — संसार में सबसे बड़ा धर्म क्या है, किसके स्मरण से जीव दुखों से मुक्त होता है? उत्तर में भीष्म ने भगवान विष्णु के एक हज़ार दिव्य नामों का गान किया। यहाँ प्रत्येक नाम का सरल हिन्दी अर्थ दिया गया है।
📖 महाभारत, अनुशासन पर्व
अध्याय सूची
1
श्लोक 1–10
विश्वम्, विष्णुः, वषट्कारः, पूतात्मा, परमात्मा, केशवः, पुरुषोत्तमः...
2
श्लोक 11–20
अजः, अच्युतः, रुद्रः, जनार्दनः, वामनः, माधवः, गोविन्दः...
3
श्लोक 21–30
हंसः, गुरुः, नारायणः, सहस्रमूर्धा, विश्वात्मा, प्रकाशात्मा...
4
श्लोक 31–40
भानुः, अनलः, ब्रह्मा, वासुदेवः, विश्वमूर्तिः, अनेकमूर्तिः...
5
श्लोक 41–50
भक्तवत्सलः, लोकनाथः, अमृतांशः, सर्वज्ञः, सुलभः...
6
श्लोक 51–60
अमूर्तिः, अचिन्त्यः, योगीशः, धनुर्धरः, स्वस्तिदः, अक्रूरः...
7
श्लोक 61–70
प्राणदः, प्रणवः, यज्ञः, देवकीनन्दनः, सर्वप्रहरणायुधः...
8
श्लोक 71–80
वनमाली, नारायणः, विष्णुः, वासुदेवः — फल-श्रुति आरम्भ...
9
श्लोक 81–90
फल-श्रुति — वासुदेव-भक्ति, नारायण-स्मरण, सर्वव्यापकता...
10
श्लोक 91–100
फल-श्रुति — रामनाम, ब्रह्मा-स्तुति, सञ्जय-वचन...
11
श्लोक 101–107
समापन — योगक्षेम, परित्राणाय, नारायण-समर्पण, क्षमा-प्रार्थना...