📿 श्लोक संग्रह

श्लोक संग्रह

संस्कृत श्लोकों का सरल हिन्दी अर्थ
📖 प्राचीन भारतीय ग्रंथ

श्रीमद्भगवद्गीता के प्रसिद्ध श्लोक — कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण का अर्जुन को उपदेश।

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कर्मण्येवाधिकारस्ते
गीता 2.47 · कर्म करो, फल की चिंता छोड़ो
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यदा यदा हि धर्मस्य
गीता 4.7 · जब-जब धर्म घटे, भगवान आते हैं
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वासांसि जीर्णानि
गीता 2.22 · आत्मा अमर है — शरीर बदलते हैं
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कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्
गीता 11.32 · मैं काल हूँ — विश्वरूप
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मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय
गीता 2.14 · सुख-दुख आते-जाते हैं
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उद्धरेदात्मनात्मानं
गीता 6.5 · अपना उद्धार स्वयं करो
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अनन्याश्चिन्तयन्तो माम्
गीता 9.22 · एकनिष्ठ भक्त का योग-क्षेम
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सर्वधर्मान्परित्यज्य
गीता 18.66 · गीता का अंतिम उपदेश
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परित्राणाय साधूनां
गीता 4.8 · सज्जनों की रक्षा, युग-युग में
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यद्यदाचरति श्रेष्ठः
गीता 3.21 · बड़े लोगों का उदाहरण
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ध्यायतो विषयान्पुंसः
गीता 2.62 · आसक्ति से क्रोध का क्रम
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क्रोधाद्भवति सम्मोहः
गीता 2.63 · क्रोध से पतन
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मत्तः परतरं नान्यत्
गीता 7.7 · सब मुझमें पिरोया है
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रसोऽहमप्सु कौन्तेय
गीता 7.8 · जल में रस, सूर्य में तेज
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ऊर्ध्वमूलमधःशाखम्
गीता 15.1 · उल्टा अश्वत्थ वृक्ष
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न जायते म्रियते वा
गीता 2.20 · आत्मा न जन्मती, न मरती
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अद्वेष्टा सर्वभूतानां
गीता 12.13 · आदर्श भक्त के गुण
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श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः
गीता 3.35 · अपना धर्म श्रेष्ठ
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दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः
गीता 2.56 · स्थितप्रज्ञ की पहचान
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विद्याविनयसम्पन्ने
गीता 5.18 · सबमें समान दृष्टि
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चञ्चलं हि मनः कृष्ण
गीता 6.34 · मन बड़ा चंचल है
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अहमात्मा गुडाकेश
गीता 10.20 · सबके हृदय में आत्मा
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समं सर्वेषु भूतेषु
गीता 13.28 · सबमें समान परमेश्वर

प्राचीन उपनिषदों के प्रसिद्ध मंत्र — वेदांत दर्शन का सार।

महाभारत, ब्रह्मांड पुराण और पद्म पुराण से प्रसिद्ध स्तोत्र श्लोक।

ऋग्वेद और उपनिषदों के प्रसिद्ध मंत्र — प्राचीन प्रार्थनाएँ।

पूर्ण स्तोत्र — अध्याय-वार पद-अर्थ और सरल हिन्दी व्याख्या सहित।

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