चौबीसवाँ शक्तिपीठ

वक्रेश्वर

जहाँ सती का भ्रू-मध्य गिरा — बीरभूम का वक्रेश्वर पीठ
📍 वक्रेश्वर, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत
सती का अंग
भ्रू-मध्य (भ्रूमध्य/मन)
शक्ति
महिषमर्दिनी
भैरव
वक्रनाथ
📖 देवी भागवत पुराण, सप्तम स्कन्ध

देवी भागवत पुराण के सप्तम स्कंध में बताया गया है कि जब माता सती ने दक्ष यज्ञ में अपने प्राण त्यागे, तब भगवान शिव उनके शव को लेकर विलाप करते हुए भटकने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को विभक्त किया। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।

परंपरा में कहा गया है कि इस स्थान पर सती का भ्रू-मध्य गिरा। यहाँ शक्ति महिषमर्दिनी के रूप में और शिव वक्रनाथ भैरव के रूप में विराजित माने जाते हैं। पीठनिर्णय तंत्र में इस स्थान को इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना गया है।

देवी भागवत पुराण के अनुसार यहाँ सती का भ्रू-मध्य गिरा — यहाँ शक्ति महिषमर्दिनी और भैरव वक्रनाथ विराजित हैं।

वक्रेश्वर शक्तिपीठ वक्रेश्वर, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत में स्थित है। परंपरा में इसे इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना जाता रहा है। यहाँ शक्ति महिषमर्दिनी के रूप में पूजित हैं और भैरव का रूप वक्रनाथ माना गया है।

भक्त दूर-दूर से यहाँ माता के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि और अन्य देवी पर्वों पर यहाँ विशेष भीड़ देखी जाती है।

स्थान
वक्रेश्वर, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत
सती का अंग
भ्रू-मध्य (भ्रूमध्य/मन)
शक्ति
महिषमर्दिनी
भैरव
वक्रनाथ
✈️
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डे से वक्रेश्वर पहुँचा जा सकता है।
🚂
रेल मार्ग
निकटतम रेलवे स्टेशन से वक्रेश्वर सड़क मार्ग से जुड़ा है।
🚗
सड़क मार्ग
वक्रेश्वर सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। स्थानीय बस और टैक्सी उपलब्ध रहती हैं।
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