सत्रहवाँ शक्तिपीठ

रत्नावली

जहाँ सती का दक्षिण स्कन्ध गिरा — हुगली का रत्नावली पीठ
📍 खानाकुल, हुगली, पश्चिम बंगाल, भारत
सती का अंग
दक्षिण स्कन्ध (दायाँ कन्धा)
शक्ति
कुमारी
भैरव
शिव
📖 देवी भागवत पुराण, सप्तम स्कन्ध

देवी भागवत पुराण के सप्तम स्कंध में बताया गया है कि जब माता सती ने दक्ष यज्ञ में अपने प्राण त्यागे, तब भगवान शिव उनके शव को लेकर विलाप करते हुए भटकने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को विभक्त किया। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।

परंपरा में कहा गया है कि इस स्थान पर सती का दक्षिण स्कन्ध गिरा। यहाँ शक्ति कुमारी के रूप में और शिव शिव भैरव के रूप में विराजित माने जाते हैं। पीठनिर्णय तंत्र में इस स्थान को इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना गया है।

देवी भागवत पुराण के अनुसार यहाँ सती का दक्षिण स्कन्ध गिरा — यहाँ शक्ति कुमारी और भैरव शिव विराजित हैं।

रत्नावली शक्तिपीठ खानाकुल, हुगली, पश्चिम बंगाल, भारत में स्थित है। परंपरा में इसे इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना जाता रहा है। यहाँ शक्ति कुमारी के रूप में पूजित हैं और भैरव का रूप शिव माना गया है।

भक्त दूर-दूर से यहाँ माता के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि और अन्य देवी पर्वों पर यहाँ विशेष भीड़ देखी जाती है।

स्थान
खानाकुल, हुगली, पश्चिम बंगाल, भारत
सती का अंग
दक्षिण स्कन्ध (दायाँ कन्धा)
शक्ति
कुमारी
भैरव
शिव
✈️
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डे से खानाकुल पहुँचा जा सकता है।
🚂
रेल मार्ग
निकटतम रेलवे स्टेशन से खानाकुल सड़क मार्ग से जुड़ा है।
🚗
सड़क मार्ग
खानाकुल सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। स्थानीय बस और टैक्सी उपलब्ध रहती हैं।
← कुरुक्षेत्र (सावित्रीपीठ) 17 / 51 मिथिला →