चौंतीसवाँ शक्तिपीठ

पञ्चसागर

जहाँ सती के अधो दन्त गिरे — पौराणिक पञ्चसागर क्षेत्र
📍 पञ्चसागर (स्थान परंपरा में विवादित)
सती का अंग
अधो दन्त (निचले दाँत)
शक्ति
वाराही
भैरव
महारुद्र
📖 देवी भागवत पुराण, सप्तम स्कन्ध

देवी भागवत पुराण के सप्तम स्कंध में बताया गया है कि जब माता सती ने दक्ष यज्ञ में अपने प्राण त्यागे, तब भगवान शिव उनके शव को लेकर विलाप करते हुए भटकने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को विभक्त किया। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।

परंपरा में कहा गया है कि इस स्थान पर सती का अधो दन्त गिरा। यहाँ शक्ति वाराही के रूप में और शिव महारुद्र भैरव के रूप में विराजित माने जाते हैं। पीठनिर्णय तंत्र में इस स्थान को इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना गया है।

देवी भागवत पुराण के अनुसार यहाँ सती का अधो दन्त गिरा — यहाँ शक्ति वाराही और भैरव महारुद्र विराजित हैं।

पञ्चसागर शक्तिपीठ पञ्चसागर (स्थान परंपरा में विवादित) में स्थित है। परंपरा में इसे इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना जाता रहा है। यहाँ शक्ति वाराही के रूप में पूजित हैं और भैरव का रूप महारुद्र माना गया है।

भक्त दूर-दूर से यहाँ माता के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि और अन्य देवी पर्वों पर यहाँ विशेष भीड़ देखी जाती है।

स्थान
पञ्चसागर (स्थान परंपरा में विवादित)
सती का अंग
अधो दन्त (निचले दाँत)
शक्ति
वाराही
भैरव
महारुद्र
✈️
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डे से पञ्चसागर (स्थान परंपरा में विवादित) पहुँचा जा सकता है।
🚂
रेल मार्ग
निकटतम रेलवे स्टेशन से पञ्चसागर (स्थान परंपरा में विवादित) सड़क मार्ग से जुड़ा है।
🚗
सड़क मार्ग
पञ्चसागर (स्थान परंपरा में विवादित) सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। स्थानीय बस और टैक्सी उपलब्ध रहती हैं।
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