सत्ताईसवाँ शक्तिपीठ

नन्दीपुर

जहाँ सती का कण्ठहार गिरा — बीरभूम का नन्दीपुर पीठ
📍 सैन्थिया, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत
सती का अंग
कण्ठहार (गले की अस्थि)
शक्ति
नन्दिनी
भैरव
नन्दीकेश्वर
📖 देवी भागवत पुराण, सप्तम स्कन्ध

देवी भागवत पुराण के सप्तम स्कंध में बताया गया है कि जब माता सती ने दक्ष यज्ञ में अपने प्राण त्यागे, तब भगवान शिव उनके शव को लेकर विलाप करते हुए भटकने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को विभक्त किया। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।

परंपरा में कहा गया है कि इस स्थान पर सती का कण्ठहार गिरा। यहाँ शक्ति नन्दिनी के रूप में और शिव नन्दीकेश्वर भैरव के रूप में विराजित माने जाते हैं। पीठनिर्णय तंत्र में इस स्थान को इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना गया है।

देवी भागवत पुराण के अनुसार यहाँ सती का कण्ठहार गिरा — यहाँ शक्ति नन्दिनी और भैरव नन्दीकेश्वर विराजित हैं।

नन्दीपुर शक्तिपीठ सैन्थिया, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत में स्थित है। परंपरा में इसे इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना जाता रहा है। यहाँ शक्ति नन्दिनी के रूप में पूजित हैं और भैरव का रूप नन्दीकेश्वर माना गया है।

भक्त दूर-दूर से यहाँ माता के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि और अन्य देवी पर्वों पर यहाँ विशेष भीड़ देखी जाती है।

स्थान
सैन्थिया, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत
सती का अंग
कण्ठहार (गले की अस्थि)
शक्ति
नन्दिनी
भैरव
नन्दीकेश्वर
✈️
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डे से सैन्थिया पहुँचा जा सकता है।
🚂
रेल मार्ग
निकटतम रेलवे स्टेशन से सैन्थिया सड़क मार्ग से जुड़ा है।
🚗
सड़क मार्ग
सैन्थिया सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। स्थानीय बस और टैक्सी उपलब्ध रहती हैं।
← अट्टहास 27 / 51 लंका →