उनतीसवाँ शक्तिपीठ

काशी (विशालाक्षी)

जहाँ सती का कुण्डल गिरा — काशी का विशालाक्षी पीठ
📍 मणिकर्णिका घाट, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत
सती का अंग
कुण्डल (कर्णाभूषण)
शक्ति
विशालाक्षी
भैरव
काल भैरव
📖 देवी भागवत पुराण, सप्तम स्कन्ध

देवी भागवत पुराण के सप्तम स्कंध में बताया गया है कि जब माता सती ने दक्ष यज्ञ में अपने प्राण त्यागे, तब भगवान शिव उनके शव को लेकर विलाप करते हुए भटकने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को विभक्त किया। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।

परंपरा में कहा गया है कि इस स्थान पर सती का कुण्डल गिरा। यहाँ शक्ति विशालाक्षी के रूप में और शिव काल भैरव भैरव के रूप में विराजित माने जाते हैं। पीठनिर्णय तंत्र में इस स्थान को इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना गया है।

देवी भागवत पुराण के अनुसार यहाँ सती का कुण्डल गिरा — यहाँ शक्ति विशालाक्षी और भैरव काल भैरव विराजित हैं।

काशी (विशालाक्षी) शक्तिपीठ मणिकर्णिका घाट, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत में स्थित है। परंपरा में इसे इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना जाता रहा है। यहाँ शक्ति विशालाक्षी के रूप में पूजित हैं और भैरव का रूप काल भैरव माना गया है।

भक्त दूर-दूर से यहाँ माता के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि और अन्य देवी पर्वों पर यहाँ विशेष भीड़ देखी जाती है।

स्थान
मणिकर्णिका घाट, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत
सती का अंग
कुण्डल (कर्णाभूषण)
शक्ति
विशालाक्षी
भैरव
काल भैरव
✈️
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डे से मणिकर्णिका घाट पहुँचा जा सकता है।
🚂
रेल मार्ग
निकटतम रेलवे स्टेशन से मणिकर्णिका घाट सड़क मार्ग से जुड़ा है।
🚗
सड़क मार्ग
मणिकर्णिका घाट सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। स्थानीय बस और टैक्सी उपलब्ध रहती हैं।
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