बाईसवाँ शक्तिपीठ

जयन्ती

जहाँ सती की वाम जंघा गिरी — जयन्तिया पहाड़ियों में
📍 जयन्तिया पहाड़ी, सिलहट, बांग्लादेश
सती का अंग
वाम जंघा (बायीं जाँघ)
शक्ति
जयन्ती
भैरव
क्रमदीश्वर
📖 देवी भागवत पुराण, सप्तम स्कन्ध

देवी भागवत पुराण के सप्तम स्कंध में बताया गया है कि जब माता सती ने दक्ष यज्ञ में अपने प्राण त्यागे, तब भगवान शिव उनके शव को लेकर विलाप करते हुए भटकने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को विभक्त किया। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।

परंपरा में कहा गया है कि इस स्थान पर सती का वाम जंघा गिरा। यहाँ शक्ति जयन्ती के रूप में और शिव क्रमदीश्वर भैरव के रूप में विराजित माने जाते हैं। पीठनिर्णय तंत्र में इस स्थान को इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना गया है।

देवी भागवत पुराण के अनुसार यहाँ सती का वाम जंघा गिरा — यहाँ शक्ति जयन्ती और भैरव क्रमदीश्वर विराजित हैं।

जयन्ती शक्तिपीठ जयन्तिया पहाड़ी, सिलहट, बांग्लादेश में स्थित है। परंपरा में इसे इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना जाता रहा है। यहाँ शक्ति जयन्ती के रूप में पूजित हैं और भैरव का रूप क्रमदीश्वर माना गया है।

भक्त दूर-दूर से यहाँ माता के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि और अन्य देवी पर्वों पर यहाँ विशेष भीड़ देखी जाती है।

स्थान
जयन्तिया पहाड़ी, सिलहट, बांग्लादेश
सती का अंग
वाम जंघा (बायीं जाँघ)
शक्ति
जयन्ती
भैरव
क्रमदीश्वर
✈️
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डे से जयन्तिया पहाड़ी पहुँचा जा सकता है।
🚂
रेल मार्ग
निकटतम रेलवे स्टेशन से जयन्तिया पहाड़ी सड़क मार्ग से जुड़ा है।
🚗
सड़क मार्ग
जयन्तिया पहाड़ी सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। स्थानीय बस और टैक्सी उपलब्ध रहती हैं।
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