पर्व और त्यौहार

नवरात्रि

देवी दुर्गा की नौ-दिवसीय आराधना — दसवें दिन विजयादशमी
📍 पूरे भारत में
तिथि
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी (विजयादशमी दसवें दिन)
हिन्दू मास
आश्विन (शारदीय नवरात्रि) — मुख्य
मुख्य देवी
माँ दुर्गा — नौ रूपों में
📖 मार्कंडेय पुराण (दुर्गा सप्तशती) और देवी भागवत पुराण

मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य में एक पुरानी कथा है। बहुत समय पहले की बात है — महिषासुर नाम का एक असुर था। उसने कठोर तपस्या की और ब्रह्मा जी से यह वरदान माँगा कि कोई देव या असुर उसे न मार सके।

वरदान मिलते ही महिषासुर ने तीनों लोकों में उपद्रव मचाना शुरू कर दिया। देवताओं को स्वर्ग से खदेड़ दिया। सभी देव परेशान होकर ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पास पहुँचे। दुर्गा सप्तशती के अनुसार, तब तीनों देवों के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई — देवी दुर्गा।

देवी भागवत पुराण में बताया गया है कि सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र देवी को अर्पित किए। शिव ने त्रिशूल दिया, विष्णु ने चक्र दिया, इंद्र ने वज्र दिया। देवी एक शेर पर सवार होकर महिषासुर के सामने आईं।

दुर्गा सप्तशती के अनुसार, देवी दुर्गा ने नौ दिन तक महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन उस असुर का अंत कर धर्म की पुनः स्थापना की। देवताओं ने प्रसन्न होकर देवी की स्तुति की।

इसी विजय की स्मृति में नौ दिनों तक देवी की आराधना की परंपरा चली आ रही है। इन नौ दिनों को नवरात्रि कहते हैं — 'नव' यानी नौ, 'रात्रि' यानी रात।

देवी भागवत पुराण में बताया गया है कि देवी के नौ रूप हैं जिन्हें नव दुर्गा कहते हैं। हर दिन एक रूप की पूजा होती है। ये नौ रूप शक्ति के अलग-अलग भावों को दर्शाते हैं।

मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य में बताया गया है कि शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना के साथ पूजा शुरू होती है। इन नौ दिनों में भक्त व्रत रखते हैं, दीप जलाते हैं और देवी का पाठ करते हैं।

दसवें दिन — विजयादशमी को — भक्त देवी की विशेष पूजा करते हैं। इसी दिन को दशहरा भी कहते हैं। वाल्मीकि रामायण की परंपरा में इसी दिन को राम की रावण पर विजय से भी जोड़ा जाता है — इस कथा के बारे में कहानियाँ खंड में पढ़ा जा सकता है।

गुजरात की प्राचीन लोक परंपरा है कि नवरात्रि में देवी के सम्मान में सामूहिक नृत्य किया जाता है — इसे गरबा कहते हैं। यह भक्ति और उत्सव दोनों का मिला-जुला भाव है।

वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं — चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ। इनमें आश्विन की शारदीय नवरात्रि सबसे प्रमुख मानी जाती है। प्रत्येक का अपना विशेष अर्थ और ऋतु-संधि का भाव रहा है।

नौ दिन — नौ रूप — एक ही शक्ति। जो संसार को थामे हुए है।

मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य में नवरात्रि को शक्ति की उपासना का पर्व बताया गया है। भक्त इन नौ दिनों में उपवास, जागरण और देवी पाठ के माध्यम से देवी की आराधना करते हैं। परंपरा के अनुसार ये दिन अपनी भीतरी शक्ति को पहचानने के लिए होते हैं।

देवी भागवत पुराण में वर्णित है कि नवरात्रि का पर्व वर्ष के संधि-काल में आता है — जब एक ऋतु समाप्त होती है और दूसरी शुरू होती है। चैत्र नवरात्रि वसंत और ग्रीष्म की संधि है, शारदीय नवरात्रि वर्षा और शरद की। इन संधि-कालों में देवी की उपासना की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

नवरात्रि केवल एक उत्सव नहीं — यह पूरे भारत में अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। बंगाल में दुर्गापूजा, गुजरात में गरबा, उत्तर भारत में रामलीला और दशहरा — सभी इसी नौ-दिवसीय परंपरा के अंग हैं।

दिन 1 — शैलपुत्री
पर्वतराज हिमालय की पुत्री — प्रकृति और धैर्य का रूप
दिन 2 — ब्रह्मचारिणी
तपस्विनी रूप — संकल्प और साधना
दिन 3 — चंद्रघंटा
मस्तक पर अर्धचंद्र — शांति और साहस
दिन 4 — कूष्मांडा
सृष्टि की रचयिता रूप
दिन 5 — स्कंदमाता
कार्तिकेय (स्कंद) की माता
दिन 6 — कात्यायनी
महर्षि कात्यायन के यहाँ प्रकट रूप
दिन 7 — कालरात्रि
अंधकार का नाश करने वाली शक्ति
दिन 8 — महागौरी
शुभ्र और शांत रूप
दिन 9 — सिद्धिदात्री
सिद्धि और ज्ञान प्रदान करने वाली
🪔
शारदीय नवरात्रि
आश्विन मास की यह नवरात्रि सबसे प्रसिद्ध है। मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य में इसका विशेष उल्लेख है। शरद ऋतु के आगमन का भी समय।
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विजयादशमी / दशहरा
दसवें दिन देवी की विजय और धर्म की पुनः स्थापना का उत्सव। कुछ परंपराओं में यही दिन वाल्मीकि रामायण के अनुसार राम की रावण पर विजय से भी जुड़ा है। रामायण की कहानियाँ कहानियाँ खंड में पढ़ी जा सकती हैं।
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गरबा और डांडिया
गुजरात में गरबा और डांडिया रास की प्राचीन लोक परंपरा रही है। देवी के सम्मान में सामूहिक नृत्य — रात भर चलने वाला उत्सव।
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चार नवरात्रि
वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं — चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ। इनमें आश्विन (शारदीय) सबसे प्रमुख मानी जाती है। प्रत्येक का अपना विशेष अर्थ रहा है।