पर्व और त्यौहार

हनुमान जयंती

वायुपुत्र हनुमान के जन्म का पावन पर्व — भक्ति, शक्ति और सेवा का उत्सव
📍 पूरे भारत में
तिथि
चैत्र पूर्णिमा (उत्तर भारत) / क्षेत्रानुसार भिन्न
हिन्दू मास
चैत्र
मुख्य देवता
भगवान हनुमान (वायुपुत्र)
📖 वाल्मीकि रामायण, ब्रह्मांड पुराण, वायु पुराण और पद्म पुराण

ब्रह्मांड पुराण और वायु पुराण के अनुसार, अंजना नाम की एक देवकन्या थीं। उन्होंने बहुत वर्षों तक तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर वायुदेव ने उन्हें अपना आशीर्वाद दिया।

अंजना के पति का नाम केसरी था। वे बड़े वीर और धर्मात्मा थे। वायुदेव के आशीर्वाद से अंजना की गोद में एक अद्भुत बालक ने जन्म लिया। यही बालक आगे चलकर हनुमान के नाम से प्रसिद्ध हुए।

वाल्मीकि रामायण में बताया गया है कि हनुमान के जन्म का समाचार सुनकर देवताओं ने आकाश से फूल बरसाए। वायु शांत हो गई। सब ओर आनंद छा गया।

बचपन में एक बार छोटे हनुमान ने उगते हुए सूर्य को देखा। उन्हें लगा यह कोई बड़ा पका हुआ फल है। वे उछलकर सूर्य की ओर दौड़ पड़े। यह प्रसंग उनकी असाधारण शक्ति का पहला संकेत था।

वायु पुराण के अनुसार, देवताओं ने बाल हनुमान को अनेक वरदान दिए। ब्रह्मा, इंद्र और अन्य देवताओं ने उन्हें शक्तियाँ प्रदान कीं। इसी से वे भविष्य में अपनी दिव्य सेवा के लिए तैयार हुए।

वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड में हनुमान की राम से पहली भेंट का वर्णन है। सुग्रीव के मंत्री के रूप में वे राम से मिले। उसी क्षण से हनुमान ने अपना जीवन राम की सेवा को अर्पित कर दिया।

सुंदर कांड में हनुमान के सबसे प्रसिद्ध कार्यों का वर्णन है — समुद्र लाँघकर लंका जाना, माता सीता को खोज निकालना, उन्हें राम की मुद्रिका देकर धैर्य बँधाना। यह पूरी कथा कहानियाँ खंड में 'हनुमान की लंका यात्रा' पृष्ठ पर उपलब्ध है।

युद्ध कांड में संजीवनी की कथा है। जब लक्ष्मण मूर्छित हुए, तब हनुमान द्रोणाचल पर्वत से संजीवनी बूटी लेकर आए। उनकी इस सेवा से लक्ष्मण के प्राण बचे। इस कथा का विस्तार भी कहानियाँ खंड में 'संजीवनी बूटी' पृष्ठ पर पढ़ा जा सकता है।

पद्म पुराण के अनुसार हनुमान जयंती मुख्यतः चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है। उत्तर भारत में यही तिथि प्रचलित है। तमिलनाडु, महाराष्ट्र और ओडिशा में क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार अलग-अलग तिथियाँ हैं — सब एक ही भक्ति का स्मरण करती हैं।

हनुमान का जीवन एक सरल संदेश देता है — जहाँ राम का नाम हो, वहीं हनुमान उपस्थित रहते हैं। शक्ति जब सेवा में लगे, तभी सार्थक होती है।

जहाँ राम का नाम हो, वहीं हनुमान उपस्थित रहते हैं — यह परंपरा की सबसे प्यारी कथा है।

वाल्मीकि रामायण में हनुमान को 'वायुपुत्र', 'अंजनेय' और 'केसरीनंदन' कहा गया है। वे शक्ति और सेवा दोनों के प्रतीक हैं। ब्रह्मांड पुराण और वायु पुराण में उनके जन्म की कथा विस्तार से वर्णित है।

हनुमान जयंती मुख्यतः चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है — विशेषकर उत्तर भारत में। तमिलनाडु, महाराष्ट्र और ओडिशा में यह पर्व स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता है। पद्म पुराण में इस पर्व का उल्लेख भक्ति-पर्व के रूप में आता है।

हनुमान की सबसे बड़ी विशेषता उनकी विनय है। असाधारण शक्ति के बावजूद उन्होंने कभी अपने बल का गर्व नहीं किया। उनकी पूरी शक्ति राम की सेवा में समर्पित रही। यही भाव इस पर्व की सबसे गहरी सीख है।

मुख्य तिथि
चैत्र शुक्ल पूर्णिमा (उत्तर भारत)
माता-पिता
माता अंजना, पिता केसरी — वायुदेव के आशीर्वाद से
अन्य नाम
वायुपुत्र, मारुति, पवनसुत, अंजनीपुत्र, केसरीनंदन
प्रमुख स्रोत
वाल्मीकि रामायण (किष्किंधा-सुंदर-युद्ध कांड)
प्रिय प्रसाद
बूँदी के लड्डू, चना-गुड़
क्षेत्रीय विविधता
तमिलनाडु, महाराष्ट्र, ओडिशा में अलग तिथियाँ
🌅
चैत्र पूर्णिमा
उत्तर भारत की परंपरा में चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। ब्रह्मांड पुराण और वायु पुराण के अनुसार इसी तिथि पर हनुमान का जन्म हुआ था।
🐒
बचपन की कथा
परंपरा में बताया गया है कि बाल हनुमान ने एक बार उगते सूर्य को पका हुआ फल समझकर उसे पकड़ने के लिए छलाँग लगाई थी। यह प्रसंग उनकी असाधारण शक्ति का पहला संकेत था।
🏹
राम सेवा
वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड से हनुमान की कथा राम के साथ जुड़ती है। सीता की खोज, लंका यात्रा, संजीवनी पर्वत — ये सब उसी सेवा के प्रसंग हैं। इन कथाओं का विस्तार कहानियाँ खंड में उपलब्ध है।
🕯️
क्षेत्रीय विविधता
तमिलनाडु में मार्गशीर्ष अमावस्या, महाराष्ट्र में वैशाख कृष्ण दशमी, ओडिशा में वैशाख संक्रांति — अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी परंपराएँ रही हैं। सब एक ही भक्ति का स्मरण करती हैं।